October 5, 2026

जनजातीय समाज की धारा ही मुख्य धारा है – इंदर भगत

बिलासपुर । वीरांगना रानी दुर्गावती  502 वी की जयंती पर जनजाति गौरव समिति के तत्वाधान में  नगर में 4 अक्टूबर को कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के   वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मंत्री श्री कश्यप का स्वागत पारंपरिक कर्मा नृत्य दल के रंगा रंग नृत्य से किया गया।अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सरल स्वभाव का देश एवं संस्कृति विरोधी शक्तियां गलत फायदा उठाती है अतः जनजातीय समाज को जागृत होकर अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु सजग रहना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि के रूप में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आदिवासी वनवासी समाज के प्रकृति के प्रति और सभी प्राणियों के प्रति अगाध प्रेम को आज के भारतीय समाज को आत्मसात करना होगा जिससे कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना साकार हो।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  इंदर भगत प्रदेशाध्यक्ष जनजाति गौरव युवा समिति छत्तीसगढ़ ने अपने उद्बोधन प्राप्त में कहा कि जनजातीय समाज को अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करना चाहिए। भारत की अखंडता एवं सार्वभौमत्व पर जब जब आक्रमण हुआ तब तब जनजातीय समाज, प्रतिकार करने में सबसे आगे रहा है। इस समाज ने सदैव प्रकृति का संरक्षण करते हुए अपना जीवन यापन किया है। जनजाति समाज की धारा ही मुख्य धारा है जिस पर आज पूरा विश्व चलने को तत्पर है।

वहीं मंच पर विभिन्न जनजातियों के प्रमुख जैसे डॉ. सी एस उइके संरक्षक गोंड समाज बिलासपुर और पी एस पट्टा अध्यक्ष गोंड समाज प्रमुख बिलासपुर, चैन सिंह विंध्यराज
प्रमुख बिंझवार समाज बिलासपुर, वेदसिंह मरकाम जी सहायक संचालक ऑडिट विभाग बिलासपुर, मोहन  सुंडी,  हो मुंडा समाज प्रमुख बिलासपुर, यूरोप सिंह खैरवार  खैरवार समाज प्रमुख, अंजोरसिंह बैगा
बैगा समाज प्रमुख एवं श्रीनारायण खुशरो ने शोभा‌ बढ़ाया।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों के करकमलों से
अंतराष्ट्रीय ओपन तीरंदाजी प्रतियोगिता जापान में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का एवं छत्तीसगढ़ राज्य का नाम रोशन करने वाली शिवतराई कोटा बिलासपुर निवासी बहन कु सुलोचना राज एवं
बहन कुमारी पायल मरावी का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का अध्यक्षता सिंह मरकाम ने तथा आभार प्रदर्शन जितेंद्र ध्रुव ने किया।


कार्यक्रम का संचालन धनेश्वर सिंह नेताम ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजीव ध्रुव का विशेष योगदान रहा, साथ ही  देव सिंह पोर्ते,संबोध पैकरा, तुलेश्वर मरकाम, नारायण नेताम, देवेंद्र जगत, राहुल ध्रुव, सत्या कँवर, विशम्भर नेताम, लेखराम ध्रुव,रूपेंद्र वैष्णव आदि कार्यकर्ताओं का बड़ा योगदान  रहा।

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