

अमरकंटक(मध्यप्रदेश)। पवित्र नगरी अमरकंटक में पाँच दिवसीय ओशो मौन ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में साधकों ने मौन, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से स्वयं को जानने तथा मन की शांति का अनुभव करने का प्रयास किया।
शिविर के दौरान ओशो की ध्यान पद्धतियों के माध्यम से साधकों को अपने भीतर झाँकने, विचारों के प्रति सजग रहने और वर्तमान क्षण में जीने का अभ्यास कराया गया। पाँच दिनों तक चले इस साधना शिविर का मुख्य उद्देश्य व्यस्त जीवनशैली से दूर होकर मानसिक शांति, आत्मजागरूकता और आंतरिक ऊर्जा का अनुभव करना रहा।यह शिविर दुर्गाधारा से 2 किलोमीटर अंदर आमानला स्थित संतकुटीर नामक स्थान पर गहरे साधकों के लिए आयोजित किया गया।
आपको बता दे कि प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण अमरकंटक का शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण साधना के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहा। शिविर में सहभागियों ने ध्यान और मौन के महत्व को समझते हुए इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी अशोकानंद ऋषिकेश द्वारा किया गया।
आयोजकों के अनुसार, ऐसे ध्यान शिविर व्यक्ति को तनावमुक्त जीवन जीने, सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और स्वयं के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
यह पाँच दिवसीय साधना शिविर साधकों के लिए आत्मिक शांति, जागरूकता और आंतरिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। इस कार्यक्रम में बिलासपुर से धीरज पलेरिया निलेश जैन शामिल रहे तथा कटनी कानपुर आदि से भी साधक ने लाभ उठाया।
