November 1, 2026


बिलासपुर। संस्कारधानी यूं ही नहीं कहा जाता। यहां देश के अलग-अलग अंचलों की संस्कृति, परंपराएं और लोक आस्थाएं एक-दूसरे में इस तरह घुली-मिली हैं कि पूरा शहर विविधता में एकता की जीवंत तस्वीर बन जाता है। इन्हीं सांस्कृतिक परंपराओं में छठ महापर्व का विशेष स्थान है। सूर्योपासना, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और लोक आस्था के इस अनुपम पर्व की आहट के साथ ही अरपा तट स्थित तोरवा छठ घाट पर तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है।

पिछले 26 वर्षों से बिलासपुर में पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच, भोजपुरी समाज और सहजानंद समाज के सहयोग से सामूहिक रूप से छठ महापर्व मनाया जा रहा है। समय के साथ यह आयोजन केवल बिहार और उत्तर भारत के समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बिलासपुर की साझा सांस्कृतिक पहचान बन गया है। तोरवा स्थित छठ घाट को एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित स्थाई छठ घाट के रूप में भी पहचान मिली है। पर्व के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धा, भक्ति और जनभागीदारी इसे विशेष स्वरूप प्रदान करती है।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रविवार एक नवंबर को सुबह 11 बजे मंगलाचरण और छठी मैया के जयघोष के साथ छठ पूजा कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। समाज और समिति के वरिष्ठजनों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यालय का उद्घाटन किया। इसके साथ ही छठ महापर्व 2026 के आयोजन की औपचारिक तैयारियां भी शुरू हो गईं।

अरपा तट पर फिर सजेगा आस्था का संसार

कार्यालय शुभारंभ के साथ ही छठ घाट की सफाई, रंग-रोगन, पुल की पुताई, सजावट और विद्युत साज-सज्जा की तैयारियां प्रारंभ की जा रही हैं। छठ पूजा समिति ने पूरे आयोजन का प्रारूप तैयार कर लिया है। पदाधिकारी घाट की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि व्रतियों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। दिवाली के बाद तैयारियां और तेज गति पकड़ेंगी। समिति के सदस्य आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए जुटेंगे। कार्यालय शुभारंभ के साथ ही यहां समिति के सदस्यो और पदाधिकारियो का कार्य विभाजन किया गया।

छठ पूजा समिति ने कार्यालय का समय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित किया है। यहां छठ पूजा समिति के पदाधिकारी आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं के साथ बाहर से आने वाले और स्थानीय छठव्रतियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

चार दिनों तक सूर्योपासना और लोक आस्था का उत्सव, 13 नवंबर को होंगी माँ अरपा की महाआरती.

इस वर्ष छठ महापर्व के धार्मिक अनुष्ठान 13 नवंबर से प्रारंभ होंगे। 13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन माता अरपा की महाआरती भी की जाएगी। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को प्रातः अर्घ्य अर्पित करने के साथ महापर्व का समापन होगा।

छठ महापर्व की सबसे विशिष्ट बात इसकी सामूहिकता और प्रकृति के प्रति समर्पण है। नदी, जल, सूर्य और प्रकृति को साक्षी मानकर मनाया जाने वाला यह पर्व शुद्धता, संयम, तपस्या और पारिवारिक मंगलकामना का संदेश देता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अस्ताचलगामी सूर्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और अगले दिन उगते सूर्य की पहली किरण के साथ जीवन में नई ऊर्जा की कामना करना इस पर्व की आध्यात्मिक विशिष्टता है।

स्थानीय लोगों ने भी अपनाई परंपरा, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

बिलासपुर का छठ महापर्व अब किसी एक समाज का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे शहर का उत्सव बन चुका है। संध्या अर्घ्य के अवसर पर जहां हजारों श्रद्धालु अरपा तट पर पहुंचते हैं, वहीं सुबह के अर्घ्य के समय भी घाट पर आस्था का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। अरपा महाआरती और संध्या आरती में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी इस आयोजन को और व्यापक बनाती है।

बिलासपुर से बाहर रहने वाले अनेक परिवार भी छठ महापर्व पर अपने घर लौटते हैं। घाट पर सजे सूप, फल, दीपों की रोशनी, पारंपरिक गीतों की मधुर स्वर लहरियां और जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते व्रतियों की कतारें पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो अरपा का तट कुछ दिनों के लिए लोक संस्कृति, परंपरा और श्रद्धा के विराट उत्सव में परिवर्तित हो गया हो।

पदाधिकारियों और सदस्यों की रहेगी सहभागिता

छठ पूजा समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा, सचिव विनोद सिंह सहित पदाधिकारियों में डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास, सुधीर झा, ए.के. कंठ, लव कुमार ओझा, राम प्रताप सिंह, रौशन सिंह, धनंजय झा, प्रशांत सिंह, हरिशंकर कुशवाहा, दिलीप चौधरी, राकेश दीक्षित और डॉ. कुमुद रंजन सिंह ।

कार्यकारिणी सदस्यों में पी.सी. झा, चंद्र किशोर प्रसाद, अजीत पंडित, प्रमोद सिंह,संजय शर्मा,रामसखा चौधरी, मुकेश झा, चंदन सिंह, राजीव गिरी, निर्भय चौधरी, दिलीप श्रीवास, विकास राय, सतीश सिंह, विनोद सिन्हा, हेमंत झा, जितेंद्र ठाकुर, सी.एम. सिंह, परमेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह, रविंद्र सिंह, आशीष मिश्रा, अंबिकेश पांडे, रविंद्र कुशवाहा, शौलेंद्र सिंह, रुपेश कुशवाह,शशि मिश्रा, आदित्य सिंह, राजीव सिंह, मुन्ना सिंह, अमरकांत तिवारी राम गोस्वामी ।

समिति के मार्गदर्शन के लिए गठित संरक्षक मंडल एच.पी.एस. चौहान, एस.पी. सिंह, व्ही.एन. झा, डॉ. बृजेश सिंह, आर.पी. सिंह, अशोक झा, एस.के. सिंह, विजय ओझा, गणेश गिरी अभय नारायण राय

कार्यालय शुभारंभ अवसर पर उपरोक्त पदाधिकारीयों सहित एन पी शर्मा,संजय सिंह,बबलू कश्यप,बी बी तिवारी,सुरेंद्र प्रताप सिंह,नवल किशोर सिंह,धीरज झा,अनिल सिंह,भरत भूषण झा,दिलीप श्रीवास,निर्भय चौधरी,रामजन्म विश्वकर्मा,लव दीक्षित,शशि मिश्रा,सतीश सिंह,विशाल श्रीवास,विनोद पांडे,बृजराज सिंह,रामदेव यादव,कन्हैया चौधरी,चंदन सिंह,नागेंद्र सिंह,लक्ष्मण सिंह, रविंद्र कुशवाहा,हर्ष सिंह,सुरेश सिंह,नरेश मिश्रा, विकास राय उपस्थित रहें.

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