
बिलासपुर। सकरी क्षेत्र में विकसित हो रही आसमा सिटी कॉलोनी को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। कॉलोनी के बिल्डर सालिम जाफरी ने स्वयं स्वीकार किया है कि वर्तमान में कॉलोनी तक पहुंचने के लिए जिस सड़क का उपयोग किया जा रहा है, वह रेलवे की जमीन पर बनी हुई है। इस स्वीकारोक्ति के बाद कॉलोनी में निवेश करने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि भविष्य में रेलवे की कार्रवाई होने पर यह रास्ता कभी भी बंद हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा प्रस्तावित उसलापुर–सकरी–तखतपुर–मुंगेली नई रेल लाइन के लिए सकरी क्षेत्र में लगभग 15.0820 हेक्टेयर भूमि पहले से चिन्हांकित है और यह जमीन रेलवे के नाम दर्ज है। इसी जमीन पर पहले नगर निगम द्वारा सीसी सड़क का निर्माण किया गया था, जिसे रेलवे की आपत्ति के बाद पिछले वर्ष उखाड़ दिया गया था। उस समय स्पष्ट हो गया था कि यह जमीन रेलवे की है और यहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नियम विरुद्ध है।
इसके बावजूद अब उसी क्षेत्र में फिर से पक्की सड़क बनाकर कॉलोनी तक पहुंच बनाई गई है। यही सड़क वर्तमान में आसमा सिटी और उससे जुड़े नए प्रोजेक्ट तक पहुंचने का मुख्य रास्ता बनी हुई है। इस मामले में बिल्डर सालिम जाफरी ने कहा कि केवल उनकी कॉलोनी ही नहीं, बल्कि आसपास विकसित कई कॉलोनियों ने भी रेलवे की जमीन का उपयोग करते हुए सड़क बनाई है। उनका कहना है कि यदि रेलवे भविष्य में अपनी जमीन खाली कराता है, तो कार्रवाई सभी कॉलोनियों पर होगी, सिर्फ उनकी कॉलोनी पर ही नहीं।
बिल्डर जाफरी ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस स्थिति का पहले से अंदाजा है और उन्होंने वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था भी कर रखी है। उनके अनुसार, कॉलोनी तक सकरी क्षेत्र के अंदर से भी पहुंचने का रास्ता मौजूद है। यदि रेलवे की जमीन से होकर जाने वाला मार्ग बंद हो जाता है, तो कॉलोनी वासी उस वैकल्पिक मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, इस वैकल्पिक मार्ग की स्थिति, चौड़ाई और सुगमता को लेकर स्थानीय लोगों में कई सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि प्लॉट बेचते समय बिलासपुर–तखतपुर मुख्य मार्ग से सीधी पहुंच होने का हवाला देकर ऊंची कीमत पर प्लॉट की बिक्री की जा रही है। मुख्य सड़क से सीधे प्रवेश की सुविधा बताकर निवेशकों को आकर्षित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह रास्ता रेलवे की जमीन से होकर गुजरता है और स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं है।
हालांकि बिल्डर सालिम जाफरी का कहना है कि वे खरीदारों को पहले ही बता रहे हैं कि वर्तमान में उपयोग किया जा रहा रास्ता रेलवे की जमीन पर है और भविष्य में उन्हें वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना पड़ सकता है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि खरीदारों को यह जानकारी दी जा रही है, तो क्या इसे लिखित रूप में दस्तावेजों में दर्ज किया जा रहा है या केवल मौखिक रूप से बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निवेशकों को इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि कॉलोनी तक पहुंचने का वर्तमान मार्ग स्थायी नहीं है। ऐसे में यदि रेलवे ने प्रस्तावित रेल लाइन के लिए काम शुरू किया या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, तो कॉलोनी तक पहुंच बाधित हो सकती है और निवेशकों की बड़ी रकम फंसने का खतरा बढ़ जाएगा।
यह मामला अब केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि रेलवे की जमीन पर बार-बार निर्माण कैसे हो रहा है और संबंधित विभाग इस पर निगरानी क्यों नहीं रख पा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय बन गया है कि क्या कॉलोनियों के विकास और प्लॉट बिक्री के दौरान खरीदारों को पूरी और पारदर्शी जानकारी दी जा रही है या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने आसमा सिटी कॉलोनी में निवेश करने वाले लोगों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है। अब सभी की नजर रेलवे और संबंधित प्रशासनिक विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कॉलोनी तक पहुंच का भविष्य क्या होगा और निवेशकों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।

